यून ही मिलना बिछडना तेा तक्दीऱ् हमारी हैं
कल वेा गयॆ थॆ, आज हमारी बारी हैं
न भूल पायेंगॆ उनकॆा उम्ऱ् भऱ
जिन्दगि कॆ ऎक् उंसुऱ् उनकॆ साथ जॆा गुजारी हैं
-- Darshan Jeeth Singh
अल्फास् न सही, नजरेा का इशार तेा हैं
दिन रात न सही, अन्धेरा औऱ उजाला तेा हैं
खेायॆ खयालेां से चाहत् डून्टते हैं शक्स्
मॆाहब्ब्त् हमेशा इशारॆां कॆ सहारॆां सॆ हैं
-- Roy Mammen
Saturday, March 3, 2007
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